Sadachar In Hindi Essay On Swachh

सदाचार पर निबन्ध | Essay on Good Behaviour in Hindi!

कोई आपकी ईमानदारी, आपकी सच्चाई, आपकी बुद्धिमत्ता अथवा आपकी अच्छाई के बारे में नहीं जान पाता, जब तक आप अपने कार्य द्वारा उदाहरण प्रस्तुत न करें । प्रत्येक परिवार तथा उसके सदस्य एक समाज के अंग हैं । उस समाज से सम्बन्धित कुछ नियम तथा मर्यादाएँ हैं ।

इन मर्यादाओं का पालन करना प्रत्येक व्यक्ति के लिए किसी न किसी सीमा तक अनिवार्य होता है । सत्य बोलना, चोरी न करना, दूसरों का भला सोचना और करना, सबसे प्रेमपूर्वक व्यवहार करना तथा स्त्रियों का सम्मान करना और उनकी ओर बुरी नजर न डालना आदि कुछ ऐसे गुण हैं जो सदाचार के अन्तर्गत आते हैं । सदाचार का सार यह है कि, व्यक्ति अन्य व्यक्तियों की स्वतन्त्रता का अतिक्रमण किये बिना अपना गौरव बनाये रहे ।

सदाचार का अर्थ है उत्तम आचरण । सदाचार दो शब्दों से मिलकर बना है – सत + आचार । सदाचार शब्द में सत्य आचरण की ओर संकेत किया गया है । ऐसा आचरण जिस में सब सत्य हो और तनिक भी सत्य न हो । जिस व्यक्ति में सदाचार होता है उसे सँसार में सम्मान मिलता है ।

सदाचार की चमक के आगे सँसार के हर प्रकार की धन दौलत की चमक फीकी है । सदाचार एक ऐसा अनमोल हीरा है जिसकी कीमत नहीं आँकी जा सकती है । ईसा मसीह, मुहम्मद साहब, गुरू नानक, स्वामी दयानन्द सरस्वती, रवीन्द्र नाथ टैगोर, ईश्वर चन्द विद्यासागर, मार्टिन लूथर तथा महात्मा गांधी के पास कोई धन दौलत तो नहीं थी। किन्तु वे बादशाह थे ।

उन लोगों के पास सदाचार रूपी अनमोल हीरा था । जब वे जीवित थे तो उन्हें पूरे विश्व का सम्मान प्राप्त था । अपने सदाचार तथा सद्व्यवहार के गुण के कारण वे संसार में सदैव के लिये अमरत्व पा गये । जहाँ सदाचार मनुष्य को सम्मान दिलाता है, वहीं दुराचार के कारण मनुष्य को घृणा मिलती है । भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में राम की पूजा होती है ।

राम जैसे सदाचारी का उदाहरण ससार में नहीं मिलता । इसके विपरीत रावण जगत प्रसिद्ध दुराचारी था । आज भी संसार उससे पूणा करता है और इस घृणा की अभिव्यक्ति हर वर्ष रावण का पुतला जलाकर की जाती है । जहाँ दुराचारी व्यक्ति की आयु अल्प होती है और वह सदैव रोगग्रस्त रहता है वहाँ सदाचारी व्यक्ति स्वस्थ एवं प्रसन्नचित्त रहता है और दीर्घ आयु को प्राप्त होता है ।

सदाचारी में सहिष्णुता, क्षमा, संयम, अहिंसा और धैर्य आदि गुण होते हैं, जिनके कारण वह कभी भी तनावग्रस्त नहीं रहता और सदैव आनन्द में रहता है, क्योंकि दुराचारी व्यक्ति सदैव पाप में संलिप्त रहता है इस कारण वह रोगग्रस्त, व्याकुल तथा दु:खी रहता है ।

सदाचारी बनना कोई सरल कार्य नहीं है । सदाचारी बनने के लिए घोर प्रयत्न करने पड़ते हैं । सदाचार के वजि बचपन में ही डाले जाते हैं । इसलिए भारतीय जीवन शैली में ब्रह्मचर्य आश्रम की व्यवस्था है ।आठ से पच्चीस वर्ष की आयु तक बालक गुरू की छत्र-छाया में रहकर शिक्षा ग्रहण करता है और सदाचार के गुणों पर चलने का अभ्यास करता है ।

वह विद्वान लोगों की संगति करता है । अच्छी तथा उपयोगी पुस्तकें पड़ता है और बुरे वातावरण से दूर रहता है क्योंकि अच्छे चरित्र के निर्माण वातावरण तथा संगति एक बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं । सत्संगति अगर एक वृक्ष है तो सदाचार उस वृक्ष का फल । इसलिये बुरी संगति की अपेक्षा अकेला होना अधिक अच्छा है ।

एक तरफ सत्संगति तो दूसरी ओर अभ्यास तथा प्रभु की सहायता से धैर्य, संतोष, सहिष्णुता, अहिंसा, संयम, क्षमा, मन और वचन से एकता, विद्या, विनम्रता तथा क्रोध न करना आदि सदाचार के गुण उत्पन्न होते हैं । परिवार, समाज तथा राष्ट्र की उन्नति के लिए प्रत्येक मनुष्य में सदाचार के गुण अनिवार्य रूप से उत्पन्न किये जायें ।

दु:ख की बात है कि आज का वातावरण बहुत दूषित हो गया है । हिंसा तथा सेक्स से भरपूर फिल्में वातावरण को खराब कर रही हैं । बढ़ता हुआ अनीश्वरवाद भी सदाचार के पथ में बाधा है । सदाचार का विचार पूर्ण रूप से भारतीय है ।

नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य को पूरा करने के लिये एक बड़ा कदम हो सकता है हर भारतीय नागरिक का एक छोटा सा कदम। रोजमर्रा के जीवन में हमें अपने बच्चों को साफ-सफाई के महत्व और इसके उद्देश्य को सिखाना चाहिये। यहाँ पर हम कई लघु और बड़े निबंध आपके स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों के लिये उपलब्ध करा रहे है चलिये इसके माध्यम से हम स्वच्छता को उनके जीवन का हिस्सा बनाये।

स्वच्छता पर निबंध (क्लीनलीनेस एस्से)

You can find here some essays on Cleanliness in Hindi language for students in 100, 150, 200, 250, 300, and 400 words.

स्वच्छता पर निबंध 1 (100 शब्द)

स्वच्छता एक ऐसा कार्य नहीं है जो हमें दबाव में करना चाहिये। ये एक अच्छी आदत और स्वस्थ तरीका है हमारे अच्छे स्वस्थ जीवन के लिये। अच्छे स्वास्थ्य के लिये सभी प्रकार की स्वच्छता बहुत जरुरी है चाहे वो व्यक्तिगत हो, अपने आसपास की, पर्यावरण की, पालतु जानवरों की या काम करने की जगह (स्कूल, कॉलेज आदि) हो। हम सभी को निहायत जागरुक होना चाहिये कि कैसे अपने रोजमर्रा के जीवन में स्वच्छता को बनाये रखना है। अपनी आदत में साफ-सफाई को शामिल करना बहुत आसान है। हमें स्वच्छता से कभी समझौता नहीं करना चाहिये, ये जीवन में पानी और खाने की तरह ही आवश्यक है। इसमें बचपन से ही कुशल होना चाहिये जिसकी शुरुआत केवल हर अभिभावक के द्वारा हो सकती है पहली और सबसे बड़ी जिम्मेदारी है के रुप में।

स्वच्छता पर निबंध 2 (150 शब्द)

साफ-सफाई एक अच्छी आदत है जो स्वच्छ पर्यावरण और आदर्श जीवन शैली के लिये हर एक के पास होनी चाहिये। हमारे प्रधानमंत्री ने स्वच्छता अभियान शुरु किया है जिसे “स्वच्छ भारत” या “स्वच्छ भारत अभियान 2013 ” कहा जाता है। हमें ये समझना चाहिये कि ये केवल हमारे प्रधानमंत्री का कार्य नहीं है, बल्कि ये समाज में रहने वाले हर इंसान की जिम्मेदारी है। हम सब के स्वस्थ जीवन के लिये इस अभियान में हमें मिलकर भाग लेना चाहिये।

इसकी शुरुआत घरों, स्कूलों, कालेजों, समुदायों, कार्यालयों, संस्थानों से हो जिससे कि देश में व्यापक स्तर पर स्वच्छ भारत क्रांति हो। हमें खुद को, घर, अपने आसपास, समाज, समुदाय, शहर, उद्यान और पर्यावरण आदि को रोज स्वच्छ रखने की जरुरत है। हम सभी को स्वच्छता का ध्येय, महत्व तथा जरुरत को समझना चाहिये और इसे अपने दैनिक जीवन में लागू करना करना चाहिये। कई क्रियाओं के द्वारा स्कूलों में बच्चों के बीच स्वच्छता को प्रचारित किया जाता है जैसे स्कूल परिसरों की सफाई, क्लासरुम की सफाई, लैब की सफाई, स्वच्छता पर पोस्टर बनाना, गंदगी को अलग करना, निबंध लिखना, स्वच्छता पर पेंटिंग बनाना, कविता पाठन, समूह चर्चा, डॉक्यूमेंटरी वीडियों आदि।

स्वच्छता पर निबंध 3 (200 शब्द)

स्वच्छता हर एक की पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिये। सभी को ये समझना चाहिये कि खाने और पानी की तरह ही स्वच्छता भी बेहद आवश्यक है। बल्कि, हमें स्वच्छता को खाने और पानी से ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिये। हम केवल तभी स्वस्थ रह सकते है जब हम सब कुछ बहुत सफाई और स्वास्थ्यकर तरीके से लें। बचपन सभी के जीवन का सबसे अच्छा समय होता है जिसके दौरान स्वच्छता की आदत में कुशल हो सकते है जैसे चलना, बोलना, दौड़ना, पढ़ना, खाना आदि अभिभावक के नियमित निगरानी और सतर्कता के साये में हो।

स्कूल और कॉलेजों में स्वच्छता के विभिन्न प्रकारों के विषय पर विद्यार्थीयों को बहुत सारे होमवर्क दिये जाते है। आज के दिनों में ये बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, क्योंकि एक बहुत बड़ी जनसंख्या स्वच्छता के अभाव में बीमारी की वजह से रोज मर रही है। इसलिये, हमें जीवन में स्वच्छता के महत्व और जरुरत के बारे में जागरुक होना बेहद आवश्यक है। हजारों जीवन को बचाने और उन्हें स्वस्थ जीवन देने के लिये हम सभी को मिलकर स्वच्छता की ओर कदम बढ़ाने की जरुरत है। हमारे प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी ने एक अभियान चलाया जिसे “स्वच्छ भारत” कहा गया। भारतीय नागरिक के रुप में हम सभी को इस अभियान के उद्देश्य और लक्ष्य को पूरा करने में सक्रिय रुप से भाग लेना चाहिये।


 

स्वच्छता पर निबंध 4 (250 शब्द)

स्वच्छता एक ऐसा कार्य नहीं है जो पैसा कमाने के लिये किया जाए बल्कि, ये एक अच्छी आदत है जिसे हमें अच्छे स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवन के लिये अपनाना चाहिये। स्वच्छता सबसे पुण्य का कार्य है जिसे जीवन का स्तर बढ़ाने के लिये एक बङी जिम्मेदारी के रुप में हर एक को अनुकरण करना चाहिये। हमें अपनी व्यक्तिगत स्वच्छता, पालतु जानवरों की स्वच्छता, पर्यावरण की स्वच्छता, अपने आस-पास की स्वच्छता, और कार्यस्थल की स्वच्छता आदि करनी चाहिये। हमें पेड़ों को नहीं काटना चाहिये और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिये पेड़ लगाना चाहिये।

ये कोई बाध्यकारी कार्य नहीं है लेकिन हमें इसे शांतिपूर्ण तरीके से करना चाहिये। ये हमें मानसिक, शारीरिक, समाजिक और बौद्धिक रुप से स्वस्थ रखता है। सभी के साथ मिलकर लिया गया कदम एक बड़े कदम के रुप में परिवर्तित हो सकता है। जब एक छोटा बच्चा सफलतापूर्वक चलना, बोलना, दौड़ना सीख सकता है, और यदि अभिभावक के द्वारा इसको बढ़ावा दिया जाए तो वो बहुत आसानी से स्वच्छता की आदत को बचपन से ग्रहण कर सकता है। तर्जनी के द्वारा माता-पिता अपने बच्चे को चलना सीखाते है क्योंकि ये पूरे जीवन को जीने के लिये बहुत जरुरी है। उन्हें जरुर समझना चाहिये कि स्वच्छता एक स्वस्थ जीवन और लंबी आयु के लिये भी बहुत जरुरी होता है इसलिये उन्हे अपने बच्चों में साफ-सफाई की आदत को डालना चाहिये। अपने बच्चों में स्वच्छता को लाना एक बड़ा कदम होगा। अत: अब पूर्ण स्वच्छता हमसे बहुत दूर नहीं है। ये केवल एक पीड़ी से 4 से 5 साल दूर है क्योंकि आधुनिक काल में हमारे छोटे से बच्चे बहुत समझदार है सभी चीजों को समझने के लिये।

 

स्वच्छता पर निबंध 5 (300 शब्द)

स्वच्छता एक अच्छी आदत है जो हम सभी के लिये बहुत जरुरी है। अपने घर, पालतू जानवर, अपने आस-पास, पर्यावरण, तालाब, नदी, स्कूल आदि सहित स्वच्छता एक आदत है खुद को शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वच्छ रखने की। हमें हर समय अपने आपको शुद्ध, स्वच्छ और अच्छे से कपड़े पहन कर रहना चाहिये। ये समाज में अच्छे व्यक्तित्व और प्रभाव को बनाने में मदद करता है क्योंकि ये आपके अच्छे चरित्र को दिखाता है। धरती पर हमेशा के लिये जीवन को संभव बनाने के लिये अपने शरीर की सफाई के साथ पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों (भूमि, पानी, खाद्य पदार्थ आदि) को भी बनाए रखना चाहिये।

स्वच्छता हमें मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और बौद्धिक हर तरीके से स्वस्थ बनाता है। सामान्यत:, हमने हमेशा अपने घर में ये ध्यान दिया है कि हमारी दादी और माँ पूजा से पहले स्वच्छता को लेकर बहुत सख्त होती है, ये कोई अलग बात नहीं है, वो बस साफ-सफाई को हमारी आदत बनाना चाहती है। लेकिन वो गलत तरीका अपनाती है क्योंकि वो स्वच्छता के उद्देश्य और फायदे को नहीं बताती है इसी वजह से हमें स्वच्छता का अनुसरण करने में समस्या आती है। हर अभिवावक को तार्किक रुप से स्वच्छता के उद्देश्य, फायदे और जरुरत आदि के बारे में अपने बच्चों से बात करनी चाहिये। उन्हे जरुर बताना चाहिये कि स्वच्छता हमारे जीवन में खाने और पानी की तरह पहली प्राथमिकता है।

अपने भविष्य को चमकदार और स्वस्थ बनाने के लिये हमें हमेशा खुद का और अपने आसपास के पर्यावरण का ख्याल रखना चाहिये। हमे साबुन से नहाना, नाखुनों को काटना, साफ और इस्त्री किये हुए कपड़े आदि कार्य रोज करना चाहिये। घर को कैसे स्वच्छ और शुद्ध बनाए ये हमें अपने माता-पिता से सीखना चाहिये। हमें अपने आसपास के वातावरण को साफ रखना चाहिये ताकि किसी प्रकार की बीमारी न फैले। कुछ खाने से पहले और खाने के बाद साबुन से हाथ धोना चाहिये। हमें पूरे दिन साफ और शुद्ध पानी पीना चाहिये, हमें बाहर के खाने से बचना चाहिये साथ ही ज्यादा मसालेदार और तैयार पेय पदार्थों से परहेज करना चाहिये।


 

स्वच्छता पर निबंध 6 (400 शब्द)

स्वच्छता एक क्रिया है जिससे हमारा शरीर, दिमाग, कपड़े, घर, आसपास और कार्यक्षेत्र साफ और शुद्ध रहते है। हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिये साफ-सफाई बेहद जरुरी है। अपने आसपास के क्षेत्रों और पर्यावरण की सफाई सामाजिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के लिये बहुत जरुरी है। हमें साफ-सफाई को अपनी आदत में लाना चाहिये और गंदगी को हमेशा के लिये हर जगह से हटा देना चाहिये क्योंकि गंदगी वह जड़ है जो कई बीमारियों को जन्म देती है। जो रोज नहीं नहाता, गंदे कपड़े पहनता हो, अपने घर या आसपास को वातावरण को गंदा रखता है तो वो हमेशा बीमार रहता है। गंदगी से आसपास के क्षेत्रों में कई तरह के कीटाणु, बैक्टेरिया वाइरस तथा फंगस आदि पैदा होते है जो बीमारियों को जन्म देते है।

जिन लोगों की गंदी आदतें होती है वो भी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों को फैलाते है। संक्रमित रोग बड़े क्षेत्रों में फैलाते है और लोगों को बीमार करते है कई बार तो इससे मौत भी हो जाती है। इसलिये, हमें नियमित तौर पर अपने स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिये। हम जब भी कुछ खाने जाएँ तो अपने हाथों को साबुन से धो लें। हमें अपने शरीर और चेहरे को तीव्र नहाने से बचाना चाहिये। अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिये हमें बिल्कुल साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिये। स्वच्छता से हमारा आत्म-विश्वास बढ़ता है और दूसरों का भी हम पर भरोसा बनता है। ये एक अच्छी आदत है जो हमें हमेशा खुश रखेगी। ये हमें समाज में बहुत गौरान्वित महसूस कराएगी।

हमारे स्वस्थ जीवन शैली और जीवन के स्तर को बनाए रखने के लिये स्वच्छता बहुत जरुरी है। ये व्यक्ति को प्रसिद्ध बनाने में अहम रोल निभाती है। पूरे भारत में आमजन के बीच स्वच्छता को प्रचारित व प्रसारित करने के लिये भारत की सरकार द्वारा कई सारे कार्यक्रम और सामाजिक कानून बनाए गये और लागू किये गये है। हमें बचपन से स्वच्छता की आदत को अपनाना चाहिये और पूरे जीवन भर उनका पालन करना चाहिये। एक व्यक्ति अच्छी आदत के साथ अपने बुरे विचारों और इच्छाओं को खत्म कर सकता है।

घर या अपने आसपास में संक्रमण फैलने से बचाने और गंदगी के पूर्ण निपटान के लिये हमें ध्यान रखना चाहिये कि गंदगी को केवल कूड़ेदान में ही डाले। साफ-सफाई केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि ये घर, समाज, समुदाय, और देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है। हमें इसके महत्व और फायदो को समझना चाहिये। हमें भारत को स्वच्छ रखने की कसम खानी चाहिये कि न तो हम खुद से गंदगी करेंगे और किसी को करने देंगे।

 

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